आपणो परळीको
सोनै री धरती जठै, चांदी रो असमान।
रंग-रंगीलो रसभर्यो, प्यारो राजस्थान॥
रंग-रंगीलो रसभर्यो, प्यारो राजस्थान॥
रंग-रंगीली रसभरी राजस्थान री धरा। इणी धरा धुर उतराध चूरू, बीकानेर, श्रीगंगानगर अर हरियाणा रा सिरसा अर हिसार जिलां सूं घिरियोड़ो हनुमानगढ़ जिलो। इणी जिलै री एक तहसील नोहर। चणां उपजावण में जगत में सिरमौर। इणी तहसील रो एक जबरो गांव परळीको। श्रीगंगानगर-दिल्ली रोड़ पर नोहर सूं उत्तर-अगूणी दिसा में 14 किलोमीटर री दूरी पर आवै ओ गांव। लोकदेवता गोगाजी रो धाम गोगामेड़ी अर गुरु-गोरखनाथ री तपोभूमि गोरखटीलो (गोगाणो)भी परळीकै सूं 15 किलोमीटर आंतरै।
बडेरा बतावै कै कदी ओ जबरो-ठाडो गांव हो। 15 वर्गकिलोमीटर में फैल्योड़ै इण गांव रा 12 बास हा। हकड़ा नदी री बाढ़ स्यूं पूरो गांव विधूंस होग्यो। जूनै गांव रा निसाण आज भी देखण नै मिलै। बीं जूनै गांव में ही विक्रम संवत 1545 माघ बदी पांच्यूं नै बामणी दादी चावळी देवी सती होया, जिकां रो मिंदर आज भी गांव में है।
बडेरा बतावै नूंवो गांव वैसाख सुदी तीज विक्रमी संवत 1860 नै रामूजी बिनवाळ बसायो। बै नागौर परगनै रै धोळियै गांव स्यूं आया। पछै रूपोजी बिनवाळ करणपरै स्यूं आया। दोनां मिळ गांव बिगसायो। रामूजी रा बंसज धोळिया अर रूपैजी रा बंसज काळिया बिनवाळ कुहाया।
आज इण गांव री आबादी करीब 12 हजार अर रकबो 44 हजार बीघा है। भाखड़ा सिंचाई परियोजना री नेठराना वितरिका स्यूं अठै पाणत हुवै। जमीं उपजाऊ है अर घणकरो गांव खेती करै। नळकूपां (ट्यूबवैलों) सूं भी पाणत होवै, पण घणकरी खेती बिरखा रै आसरै ही है। राम बरसै तो खेती सरसै। गांव में हिन्दु-मुसळमान अर सिक्ख धर्म नै मानणवाळी सगळी जातियां रो लोग हिलमिल बसै। अठै जरूरत री सगळी चीज्यां रो सुभीतो है। साहित्य अर खासकर राजस्थानी साहित्य में ओ गांव भोत आगै है। आखै देस में ओ गाव 'साहित्य गांव' रै नांव सूं जाणीजै। अठै रा सेठ-साहूकार देस-विदेस में जगां-जगां आपरा कारोबार करै अर गांव स्यूं डाडो लगाव राखै। गांव रै बिगसाव में आं रो जबरो हाथ है। इंटरनेट री दुनिया में भी आज ओ गांव खासी दखल राखै।











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